मरीज़े-ग़म इसी उम्मीद में दम तोड़ जाएंगे
जिन्होंने ज़ख़्म बख़्शे हैं वही मरहम लगाएंगे
किसे मालूम था आख़िर कि ऐसे दिन भी आएंगे
बशर तो चीज़ क्या मौसम भी बंदिश भूल जाएंगे
दरख़्तों के गिराने पर ज़मीं तो काँप उट्ठेगी
मगर हमदम परिन्दे चह्चहाना भूल जाएंगे
वो जिनके हाथ होंगे कश्तियों के ग़र्क करने में
यहाँ कश्ती बचाने का वही ईनाम पाएंगे
चमन में उगने वाली पौध की यूँ परवरिश होगी
न होंगे रंगो-बू अपने जब उस पर फूल आएंगे
सुलह बर्को-बला से कर तो लेंगे हम मगर जब तक
हवा के तेज़ झोंके ही नशेमन फूँक जाएँगे
जो हमसे बच गईं मासूम बच्चों तुम गिरा देना
तआसुब की ये दीवारें हिला तो हम ही जाएंगे
--------ग़ज़लकार-मासूम ग़ाज़ियाबादी-----------
जिन्होंने ज़ख़्म बख़्शे हैं वही मरहम लगाएंगे
किसे मालूम था आख़िर कि ऐसे दिन भी आएंगे
बशर तो चीज़ क्या मौसम भी बंदिश भूल जाएंगे
दरख़्तों के गिराने पर ज़मीं तो काँप उट्ठेगी
मगर हमदम परिन्दे चह्चहाना भूल जाएंगे
वो जिनके हाथ होंगे कश्तियों के ग़र्क करने में
यहाँ कश्ती बचाने का वही ईनाम पाएंगे
चमन में उगने वाली पौध की यूँ परवरिश होगी
न होंगे रंगो-बू अपने जब उस पर फूल आएंगे
सुलह बर्को-बला से कर तो लेंगे हम मगर जब तक
हवा के तेज़ झोंके ही नशेमन फूँक जाएँगे
जो हमसे बच गईं मासूम बच्चों तुम गिरा देना
तआसुब की ये दीवारें हिला तो हम ही जाएंगे
--------ग़ज़लकार-मासूम ग़ाज़ियाबादी-----------
Follow Us
Were this world an endless plain, and by sailing eastward we could for ever reach new distances